यह कहानी हमें रामदीन माझी ने भेजा है, उनके जीवन का एक बेहद ही डरावना सच है। हम उनके आभारी हैं कि उन्होंने अपने जीवन की बेहद डरावनी स्टोरी हमारे साथ शेयर की है। आइए पढ़ते हैं हॉरर स्टोरी रामदीन मांझी की जुबानी।
मेरा नाम रामदीन माझी है। मैं किसी जमाने में एक साड़ी की दुकान पर काम करता था। लेकिन आज निवृत जीवन बिता रहा हूं। मेरे दो बेटे हैं वही अब घर का खर्चा चलाते हैं। बचपन के दिनों मुझे खेलने कूदने का बड़ा शौक था। इसलिए जवानी के दिनों में मैं गलियों के बच्चों के साथ बच्चा बनकर कभी क्रिकेट तो गिल्ली डंडा खेल लेता था। आज मैं अपने जीवन की उस खौफनाक घटना के बारे में बताऊंगा जिसके कारण कई बच्चों के अकाल मृत्यु तक हो चुकी है।मैं बात कर रहा हूं चौकड़ी वाले सीवेज के बारे में, यह हमेशा ही भूतों का अड्डा बना रहा है। बदकिस्मती से यह मौहल्ले का इकलौता चौड़ा इलाका था। जहां पर बच्चे खेलते थे।दीनदयाल गुप्ता जी के साड़ी की दुकान पर मेरी नई नई नौकरी लगी थी। एक दिन सेठ जी के बेटे के मुंडन का कार्यक्रम था। तो उन्होंने मुझे काम से जल्दी घर भेज दिया। मैं मोहल्ले के चौकड़ी में जाकर बच्चों के साथ क्रिकेट खेलने लगा। अचानक गेंद खुले सीवेज में जा गिरी और पास खड़ा हुआ नकुल नारियल के छिलके से गेंद बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था।.... तभी अचानक खुली गटर में से हलचल होने लगी। जिसे देखकर नकुल बहुत तेजी से वहां से दूर हट गया। सभी बच्चे मस्ती में थे, एक के बाद एक सभी लड़के उस गटर के बड़े-बड़े पत्थर फेंकने लगे। यह देखकर मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था। मैंने फौरन सभी बच्चों को सीवेज से दूर हो जाने के लिए कहा। उसके बाद मेरी नजर सीवेज के भूरे पानी पर पड़ी। तब मुझे लगा कि पानी के भीतर एक पीली आंखों वाली कोई विकृृृत आकृति छिपी थी और वहां से असहनीय बदबू आ रही थी। वह एहसास दिल को हिला देने वाला था। थोड़ी देर के बाद हम सब घर चले गए।उस रात मेरा ध्यान उस सीवेज पर था। घूम घूम कर मेरे मन में सिर्फ वही बात आ रही थी। मेरा मन बेचैन था। तो मैंने सोचा कि मैं खिड़की से खुली सीवेज की तरफ देखूं, तो मैं देखता हूं कि अंधेरी रात में उस गटर के पानी में खलबली मची हुई है। और एक घूघराला साया सीवेज के ऊपर नाच रहा है। उस भयानक नजारे को देखकर.. मेरे पैर कांपने लगे। कुछ देर देर बाद मुझे वहां पर नकुल भी दिखाई दिया। मैंने उसी वक्त जोर से चीख मारी.! नकुल मेरी ओर मुड़ा। लेकिन वह काला साया नकुल को सीवेज के पानी में घसीटने लगा। मैं चीखते-चिल्लाते हुए सीढ़ियों से उतरकर चौकड़ी के सीवेज की ओर दौड़ा।जब मैं दौड़कर वहां पहुंचा तो, मैं देखता हूं कि पानी हिल रहा है। शायद... वह प्रेत नकुल को अपने साथ ले गया। मैं वहीं पर अंधेरे में बैठकर रोने बिलखने लगा। कुछ देर मेंं पूरा मोहल्ला वहां पर जमा हो गया। मैंने नकुल के पापा को रोते हुए सारी घटना का विवरण दिया। लेकिन मैं चौंक गया! जब उन्होंने खिड़की की ओर इशारा करके बताया कि नकुल तो घर पर ही है। उसी रात लोगों ने मेरा खूब तमाशा बना डाला। मैं चुपचाप अपने घर में चला गया और 3 दिन बाद पता चला कि मौहल्ले का एक लड़का अमित बुखार की वजह से गुजर गया। मैं उसके घर गया तो मैंने देखा उसके हाथ पर दांत से कांटे जाने का निशान था। अमित की दादी ने बताया कि खेल खेल में नकुल के साथ झगड़ा हो गया था। तब नकुल ने अमित को काट लिया। यह उसी का निशान है।यह सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। क्योंकि मुझे पता था कि उस बच्चे की मौत का कारण बुखार नहीं बल्कि नकुल का काटना ही है। अपना शक दूर करने के लिए उस शाम मैं नकुल के घर चला गया। मैंने उससे पूछा कि, उस रात सीवेज पर तुम ही थे क्या..? उसने जवाब नहीं दिया और शैतानी हंसी हंसने लगा। मैंने उससे कहा.. कि मुंह खोलो और अपने दांत दिखाओ मुझे। तभी नकुल के शरीर से वह भयानक बदबू आने लगी, जो मुझे सीवेज पर गेंद निकालने के दौरान आई थी।यह सवाल सुनकर वह गुस्से से लाल हो गया...। फिर मुझे पागलों की तरह घूरने लगा। थोड़ी देर मैं उसकी आंखों को देखता रहा, तो मुझे उसकी आंखों में वही पीली चमक नजर आई। जो सीवेज के अंदर वह उभरी हुई विकृत आकृति में दिखाई दे रही थी। यह देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैं नकुल से दूर हट गया। इस घटना की पूरी जानकारी मैंने नकुल के माता पिता को दी और उन्हें समझाया। लेकिन समझने के बजाय वह मुझसे झगड़ा करने लगे। इस घटना के बाद मैंने वह मोहल्ला ही छोड़ दिया। लेकिन उसी अरसे में वहां रहने वाले 3 से 4 बच्चों की रहस्यमई ढंग से मृत्यु हो गई।इसके बाद मोहल्ले में नकुल का नाम कई बार प्रीत के साथ जोड़ा जा रहा था। इस वजह से उनके माता-पिता' नकुल को शहर ले ले गए और वहीं पर रहने को कहा। बाद में पता चला कि नकुल बिना बताए कहीं चला गया है। उसके माता-पिता भले ही अपने बच्चों को लापता समझ रहे हैं, लेकिन मेरा दिल कहता है कि वह सीवेज वाले प्रेत की बलि चढ़ गया।